अध्याय 06 ;- भविष्य के लिए योजनायें व्यबस्थित करें ।
(Lockdown को यादगार बनाएं श्रृंखला का अगला भाग)
जी, नमस्कार दोस्तों कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि हम अपने किए गए कृत्यों को चिंतन कर आगे आने वाले समय में इन कमियों को दूर करने हेतु प्रयास करना चाहिए। इसी प्रकार अब आप के लिए नई चुनौती है पिछले को तो नहीं सुधारा जा सकता है पर आने वाले समय को अवश्य हम उचित मार्गदर्शन से बेहतर बना सकते हैं। ये बात भी सही है कि इंसान दूसरों से बेहतर बनना चाहता है । वो भविष्य में अधिक से अधिक प्रभाव छोड़ना चाहता है किन्तु यदि आप की योजनाएं अच्छी नहीं है तो फिर ये विचार मात्र सपने बन कर रह जाएंगे ।
हमें अपने जीवन में क्या क्या उपलब्धियां हासिल करनी है , हमें। क्या क्या कार्य अपने समाज , अपने देश ,अपने बच्चों व स्वयं के लिए करने है । इन सबका blueprint तैयार कर लेना चाहिए। परीक्षा में सफलता प्राप्त करने हेतु हम जिस प्रकार ब्लूप्रिंट का उचित प्रबंध कर अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं। हमारे आने वाले दिनों के लिए हमारे कार्य विभाजन से ही मनोवांछित सफलता प्राप्त होगी ।
अतः आने वाले समय के लिए हमारे पास कोई ठोस ब्लूप्रिंट होना चाहिए । अब आपको चिंता हो रही होगी कि जीवन के ब्लूप्रिंट का खाका तैयार कैसे करें? दोस्त आप को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। आपका जिम्मेदार दोस्त होने के नाते मैं इस समस्या के लिए कुछ गप्पे सुनाकर आपका मनोरंजन करता हूं।
दोस्त , आने वाला समय न ही अपने देखा है और न मैने । हम सब इसके अच्छे होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना भी करते है। परन्तु विचार कीजिए क्या हम अपने आने वाले समय को अधिक महत्वपूर्ण और उपयोगी बनाने का ईमानदारी से प्रयास कितना करते है । महामारी का संकट पिछले एक साल से बना हुआ है, और आगे भी बना रह सकता है, किन्तु मेरी चिंता का विषय यह है कि क्या हमने आने वाले समय हेतु सकारात्मक विचारों , नवाचारों को स्वीकार किया है या नहीं। महामारी के प्रभाव से दुनिया नए सिरे से विचार करने को विवश है । चाहे कोई सा वर्ग हो सभी लोग बहुत अंदर तक इस संकट से जूझ रहे हैं। हमारे सपने और आय के स्त्रोत सब चकना चूर हो गए हैं। देश की सत्ता से भी अधिक लाभ की आशा भी नहीं है ।
युवाओं को रोजगार मिलेगा या नहीं यह तो आज के दौर का सबसे बड़ा प्रश्न है । युवा पीढ़ी दर दर की ठोकरें खाने को विवश है, न तो कोई ठोस ब्लूप्रिंट है न कोई मार्गदर्शन करने वाला। देश की सच्ची शक्ति युवाओं से होती है। और यदि युवा पीढ़ी दिशाहीन है, उसकी भावनाएं आहत हैं तो देश , कैसे महाशक्ति बनने का सपना देख सकता है? इस महशक्ती बनाएगा कौन ? आज 2 जून की रोटी की कोई स्थाई वारंटी नहीं है तो फिर कौन हमारे देश को आगे बढ़ा सकेगा । भूखे पेट ना भजन,,,, जब देश को अपनी ही आवश्यकताएं पूरी नहीं हुई थी तो दुनिया में खैरात बांट देने से किसका भला हुआ ? ये सब तो नेताओं को शोभा देता है कि खूब बातें करना और वास्तविक उपाय कभी न बताना ।
चलो में नेता तो नहीं मैंने आपका मित्र होना स्वीकारा है अतः मित्र के नाते कड़वी हकीकत बयां करता हूं कि आप शीशे में देख कर नीतियां न बनाएं नीतियां बनाने के लिए अपने अंदर के मन में झांके । आपका मन मुझसे भी कहीं अधिक होशियार है। और किसी से भी अधिक ईमानदार । आपके मन को आपकी औकात का पता है। अपनी योग्यताओं का ज्ञान है । वो भविष्य हेतु आपको तैयार करने में अधिक मदद कर सकता है। मन से मेरा आशय है आपकी अंतरात्मा की आवाज़।
जी हां , में या मुझ जैसे हजार लोग भी आपको सफल नहीं बना सकते। हा एक शिक्षक की भांति आपके रास्ते से पत्थर अवश्य हटा सकते हैं, रास्ते चुनने में मदद कर सकते हैं किन्तु आखिर में चलना तो आपको स्वयं है । ऐसे में अगर कोई आपका सच्चा साथी हो सकता है तो वो है आपका अंदरूनी मन , अंदरूनी आवाज ही ईश्वर की आवाज है, ईश्वर ही आपको मंजिल तक पहुंचा सकते हैं। वे है हमारी जीवन यात्रा को सफल बनाने में मदद कर सकते हैं। अतः यदि आप अपने अंदरूनी मन की आवाज़ सुनना सीख जाते है तो आपको किसी दूसरे व्यक्ति या साधनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा । ईश्वर हमें और आपको इस दुनियां में लेकर आए हैं तो कोई तो खास वजह होगी । कोई तो योजना बनाई गईं होगी। इसीलिए हमारे लिए अपनी अलग से किसी योजना बनाने की आवश्यकता नहीं होगी।
हमें तो अपने आप को हमारे जन्मदाता , पालनहार, रखवाले उस परमपिता परमेश्वर के श्री चरणों में समर्पित कर देना चाहिए और उनके ही निर्देशों को मानकर अपने क्रियाकलाप करने की रूपरेखा बनाना चाहिए । यह चिंतन और मनन के द्वारा संभव है। ईश्वर ने हमने किसी विशेष कार्य हेतु ही संसार का सुख लेने हेतु जन्म दिया है अतः अपने उस खास और विशेष उद्देश्य को अपने अंदर ही खोजें। में आपको इतना आश्वासन अवश्य दे सकता हूं कि आप मेरे सुझाव से कभी निराश नहीं होंगे ।
धन्यवाद।
आपका
मुरारी लाल राय
(अंदर के मन को कैसे समझा जा सकता है। इस विषय पर चर्चा अगले अध्याय में आपको पढ़ने को मिलेगी)

No comments:
Post a Comment