Sunday, 29 June 2025

ICT training जिला शिवपुरी हुई संपन्न।


अब समय डिजिटल क्रांति का आ गया है और इसमें हमारे शिक्षक पीछे नहीं रहेंगे : डीईओ शिवपुरी।
तीन दिवसीय आईसीटी प्रशिक्षण दिनांक 25 6 2025 से 27 6.2025 जिला शिवपुरी मध्य प्रदेश में आदरणीय जिला शिक्षा अधिकारी महोदय आदरणीय एडीपीसी महोदय एवं भोपाल से प्रशिक्षण प्राप्त जिला शिवपुरी एवं जिला अशोकनगर के दो दो मास्टर ट्रेनर्स की उपस्थिति में संपन्न हुआ यह प्रशिक्षण जिला शिवपुरी के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1 में दिनांक 25 जून 2025 को प्रातः 9:00 बजे प्रारंभ हुआ जिसमें प्रातः शिवपुरी जिले के 219 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षकों ने उपस्थित होकर इस प्रशिक्षण को सफल बनाया प्रशिक्षण की शुरुआत प्रातः 9:30 से विमर्श पोर्टल पर हाजिरी के साथ शुरुआत हुई जिसमें समस्त शिक्षक वर्चुअल रूम में अपने साथ टैबलेट लेकर उपस्थित हुए एवं प्रशिक्षण की शुरुआत में आदरणीय जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव जी आदरणीय एडीपीसी महोदय राजा बाबू आर्य जी एवं अशोकनगर जिले से पधारे हमारे दो मास्टर ट्रेनर्स आदरणीय प्रमोद चतुर्वेदी जी एवं आदरणीय यशवंत दामले जी तथा शिवपुरी जिले के दो मास्टर ट्रेनर्स आदरणीय श्री मुरारी लाल राय जी एवं आदरणीय देवेंद्र वर्मा जी ने मंच पर उपस्थित होकर इस प्रशिक्षण की शुरुआत की प्रशिक्षण की शुरुआत में आदरणीय जिला शिक्षा अधिकारी महोदय ने समस्त शिक्षकों को आईसीटी के बारे में विस्तृत जानकारी दी एवं समस्त शिक्षक अपना दायित्व आईसीटी के क्षेत्र में किस तरीके से निर्वहन करें इसके बारे में जानकारी दी तथा आईसीटीके माध्यम से किस प्रकार शिक्षा को रुचि कर बनाया जा सकता है इस बारे में बताया इसके बाद हमारे आदरणीय एडीपीसी महोदय द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक की भूमिका को स्पष्ट किया गया एवं किस प्रकार हम आईसीटी के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को आसान रुचिकर बना सकते हैं एवं उनकी समझ को किस प्रकार विस्तृत एवं रुचिकर बनाकर शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी को उचित ढंग से उपयोग कर सकते हैं इस बारे में बताया इसके बाद प्रातः 10:00 बजे से सर्वप्रथम आदरणीय श्री मुरारी लाल राय जी द्वारा विज्ञान शिक्षा में गेमीफिकेशन के बारे में जानकारी दी गई एवं इसी क्रम में यह प्रशिक्षण आगे बढ़ा एवं तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेस द्वारा शिक्षकों को विभिन्न प्रकार के शैक्षणिक अप जैसे दीक्षा अप आलूगुड्डू ,स्टेलरियम ,गूगल अर्थ ,फॉर्मूला, गूगल डॉक ,गूगल फॉर्म्स, गूगल शीट, गूगल क्लासरूम ,  डुओलिंगो,मेंटीमीटर, आरलूपा, ज्योजेबरा ,दीक्षा एप, ई पाठशाला, जैसे महत्वपूर्ण एप्स के बारे में जानकारी दी गई तथा उन्हें शिक्षकों से भी मोबाइल एवं टैबलेट में इंस्टॉल करवा कर उन पर प्रेजेंटेशन तैयार करवाए गए जो कि शिक्षकों को बहुत ही रुचिकर लगा एवं सभी शिक्षकों ने सीखने में अत्यंत रुचि दिखाई इसी क्रम में यह प्रशिक्षण तीन दिवस तक चला एवं प्रत्येक दिवस की सुबह आदरणीय जिला शिक्षा अधिकारी महोदय एवं आदरणीय एडीपीसी महोदय द्वारा एक नई ऊर्जा के साथ शिक्षकों का मार्गदर्शन किया जाता रहा एवं मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा इसी प्रकार यह प्रशिक्षण तीन दिवस तक चला प्रशिक्षण के दौरान कई बार यह देखा गया की बारिश के कारण लाइट चली गई फिर भी शिक्षकों ने  इसको कमी ना बताते हुए एक मौके की तरह लिया और इसके प्रति उत्तर में बोला कि अगर आईसीटी के लिए हम टैबलेट को एक टूल के रूप में उपयोग करें तो यहां हमें लाइट की आवश्यकता नहीं है और इसी क्रम में शिक्षकों ने लाइट का जाना एक कमी ना बताते हुए एक अवसर  बताया एवं टैबलेट का उचित उपयोग सीखा उस पर कुछ प्रेजेंटेशन और स्लाइड्स तैयार किया और हमारे द्वारा बनाए गए जिला शिवपुरी आईसीटी प्रशिक्षण के ग्रुप में उन्हें भेजा गया प्रशिक्षण के द्वितीय दिवस में शिक्षकों द्वारा कुछ  गूगल फॉर्म्स तैयार किए गए जिसमें उन्होंने चैट gpt के माध्यम से एवं अन्य एप्स के माध्यम से विभिन्न प्रकार की स्लाइड बनाकर हमारे समक्ष प्रस्तुत की इसी प्रकार प्रशिक्षण के अंतिम दिवस में प्रशिक्षकों द्वाराविभिन्न प्रकार के सीखे गए एप्स एवं समस्त जानकारी के बारे में प्रतिवेदन प्रस्तुत किया एवं आदरणीय जिला शिक्षा अधिकारी महोदय आदरणीय एडीपीसी महोदय एवं आदरणीय कमल गुप्ता जी का फूलों का गुलदस्ता देकर समस्त शिक्षकों ने स्वागत बंधन अभिनंदन किया एवं तीन दिवसीय प्रशिक्षण इस प्रकार समाप्त हुआ एवं अंत में शिक्षकों द्वारा जब फीडबैक दिया गया तो बताया गया कि आईसीटी के बारे में जो जानकारी मास्टर ट्रेनर्स ने हमें दी वह बहुत ही रोचक एवं उपयोगी थी जिसे हम विद्यार्थियों के लिए अप्लाई करेंगे एवं उनकी उनके लिए शिक्षा को रुचिकर बनाएंगे

Monday, 9 June 2025

मेरे प्यारे बादल

 


मेरे प्यारे बादल !

बादल ओ! बादल , तुम हो कितने प्यारे बादल |

कहाँ से आते, कहाँ को जाते नहीं बताते बादल || 

कभी सुख के, कभी दुःख के बादल

जानें कितनों की उम्मीद है बादल

कभी हमें भिगोते, कभी खुद रोते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |

कितनी दूरी से चल कर आते बादल 

कभी न रुकते कभी न थकते बादल

कभी रूठते कभी ढोल बजाते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |

कभी लगते तूफानी, कभी करते शैतानी बादल

कभी बरसाते ओले, कभी पिलाते पानी बादल

तुम्ही खेती करवाते, जीवों की उम्मीद हो बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |

शक्लें बना-बना चिड़ाते बादल ,

रोने लग जाऊ तो हँसाते बादल 

धुप लगे तो छांव भी करते बादल

प्यास लगे तो बूँदें भी बरसाते बादल

भूख लगती तो झोंका हिलाते 

मीठे –मीठे आमों को गिराते

कोन मीठा कोन खट्टा ये काम भी तोते से करवाते

कोन है रस-सा मीठ, ये मार्क भी कोयल से लगवाते 


गर्मी से यदि आये पसीना,

 पंखा कराते हवा से बादल




कितने भोले-भाले बादल, भालू-बन्दर कि शक्ल से बादल

धरती माँ कहती भाई तुमको, तो मामा लगते मेरे बादल |


बहुत दिन से घर रही हूँ

न खेली न स्कूल गई हूँ


कर दो एक बार फिर से उजाला

थक गई हूँ पी-पी काडे का प्याला

अब इंतजार,न देर करो तुम

इस संकट में ध्यान रखो तुम |


अगर जल्दी न मिटाया डरावना करोना बादल

तो फिर न कहूँगी तुमको अपना प्यारा बादल !


कहती है तुम्हारी शुभी बहना’

कभी हमको तुम भूल न जाना

पानी लाकर खूब बरसाना

कभी हमसे तुम रूठ न जाना ||

कविता :- शुभी राय  कक्षा-4, (उम्र 8 वर्ष)

    D\O प्रियदर्शनी-मुरारी राय 

  कक्षा-4,केन्द्रीय विध्यालय ITBP

करैरा, शिवपुरी (म.प्र.)







बाह सिपाही

 


*बाह रे सिपाही।*

🌱🌱🪴🪴🌱🌱

सुन ओ सिपाही, क्या तूने भांग थी खाई ,

तेरे भी तो पलते होंगे बच्चे और लुगाई ,


क्या गुनाह किया था, जो तुमने लगा दी उनकी ठुकाई,

आजादी को हासिल करने गांधी जी ने भी लड़ी लड़ाई,


ये वर्दी वाले तेरे भी तो लाल रहे होंगे ।

कहीं किसी चौराहे पर खड़े रहे होंगे ।।


तू भी तो कुछ अपनों सा खियाल कर लेता ।।

कहीं भीड़ में न खड़ा हो तेरा खुद का बेटा।


खूब जोर लगाया तुमने जो इन मासूमों को पीटा।

लहू बहा बेगुनाहों का, सड़क पर इनको घसीटा।।


गर नाराज़ है तुम्हारा आका तो क्या निर्दोष को सजा दोगे?

नौजवान रोजी रोटी को मोहताज है, क्या सबको मरवा दोगे?


देश की मिट्टी में शामिल हैं 

लहू सूरते हिन्दुस्तान का ,

बाप की जागीर न समझ,

याद रख, क्या हश्र हुआ 

सिकंदर महान का।।

@ गप्पी

😂😂😂😂

#hate_mp_police 🚨


शिक्षक की अभिलाषा


 शिक्षक की अभिलाषा

*******************

(शिक्षक- समाज को समर्पित कविता)


शीश नवा हाथ जोड़ प्रेम भाव से करता हूं सभी को नमन।

स्वास्थ रखे ईश्वर सभी को, हो जीवन में खुशियों का आगमन ।

हो कल्याण आप सभी का, बच्चे सभी के फूलें फलें।

आएं बहार आपके जीवन में, उन्नति के सभी द्वार खुलें।।


 मैं हूं एक साधारण शिक्षक,

 करता जन सेवा, पोथी का रक्षक।

सौम्य भाव से सबका आदर पाता,

सब पेट भर खा लें, फिर में खाता।।


आज नए युग में बड़े बदलाव है आए 

लोगों ने ना जाने क्यूं कर दिए हमें पराए ।


होता समाज का दर्पण, साहित्य सृजन में।

होता नाव का अर्पण , शांत निर्मल जल में

दिखे शक्ति प्रदर्शन, मेला के समतल रण में,

शिक्षक होता अवश्यकता, जीवन के हर क्षण में।।


जीवन में निराशा छाने लगे, शंका के मेघ मडराने लगें।

याद कर लेना अपने गुरुवर को, संकट सारे टलने लगें।।


देश की तस्वीर बनाते हम शिक्षक,

बिगड़ी तकदीर बनाते हम शिक्षक,

रहती न कहीं कोई कमजोर कड़ी,

अपने सुख चैन का त्याग करें हम शिक्षक। 


आज समय की पीड़ा देख कर, 

भाव रोक नहीं में पाता हूं।

उमड़ पड़ते है आंशू यूं ही,

दर्द भरी दास्तां सुनाता हूं।


नए युग में कहां से, सुंदर फोन चलन में  आ गए।

नई पीढ़ी बरवाद हो रही, उजाले ने आंखो से  जा रय।।


बच्चे भूल रहे अपने  गुरु जी ,

दिनरात खेलत बिना थके पब जी।

सरकारें नहीं देती शिक्षा निःशुल्क अब हायर ।

युवा पीढ़ी दिन रात खेले फ्री फायर।।


सबसे ज्ञानी गूगल हो गया

बिना गेंद के भूगोल हो गया

भिविषण को कौन पूछता,

भेदी तो ये  फोन हो गया।।


साधन नहीं थे आदिकाल में

संघर्ष करते थे हरहाल में

योग्य बने,निरोग रहे चिरकाल में।

खड़ा कर दिया चन्द्रगुप्त कम अंतराल में।।


मेरी महिमा को न विसराओ तुम,

मेरे तप त्याग को न भुलाओ तुम,

बांध रखा है बांध अपने सब्र का , 

न दिखाना ज़ोर अपने उग्र भाव का,


प्रलय को सदा ही मैने अपने आंचल में छिपाया है

निर्माण करने में लगा हूं, नहीं लगता कोई पराया है।।

*********

स्वरचित कविता

मुरारी राय

--------------------

मेरे प्यारे बादल ! कविता - शुभी राय कक्षा -4


 


मेरे प्यारे बादल !

बादल ओ! बादल , तुम हो कितने प्यारे बादल |

कहाँ से आते, कहाँ को जाते नहीं बताते बादल ||


कभी सुख के, कभी दुःख के बादल

जानें कितनों की उम्मीद है बादल


कभी हमें भिगोते, कभी खुद रोते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |


कितनी दूरी से चल कर आते बादल

कभी न रुकते, कभी न थकते बादल


कभी रूठते कभी, ढोल बजाते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |


कभी लगते तूफानी, कभी करते शैतानी बादल

कभी बरसाते ओले, कभी पिलाते पानी बादल |


तुम्ही खेती करवाते, जीवों की उम्मीद हो बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |


कहती है 'शुभी बहना', कभी हमको तुम भूल न जाना | 

पानी लाकर खूब बरसाना, कभी हमसे तुम रूठ न जाना ||


कविता :- शुभी राय D\O प्रियदर्शनी-मुरारी राय (शिक्षक)

         कक्षा-4, (उम्र 8 वर्ष)

केन्द्रीय विध्यालय ITBP

   करैरा, शिवपुरी (म.प्र.)