Sunday, 29 June 2025
ICT training जिला शिवपुरी हुई संपन्न।
Monday, 9 June 2025
मेरे प्यारे बादल
मेरे प्यारे बादल !
बादल ओ! बादल , तुम हो कितने प्यारे बादल |
कहाँ से आते, कहाँ को जाते नहीं बताते बादल ||
कभी सुख के, कभी दुःख के बादल
जानें कितनों की उम्मीद है बादल
कभी हमें भिगोते, कभी खुद रोते बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कितनी दूरी से चल कर आते बादल
कभी न रुकते कभी न थकते बादल
कभी रूठते कभी ढोल बजाते बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कभी लगते तूफानी, कभी करते शैतानी बादल
कभी बरसाते ओले, कभी पिलाते पानी बादल
तुम्ही खेती करवाते, जीवों की उम्मीद हो बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
शक्लें बना-बना चिड़ाते बादल ,
रोने लग जाऊ तो हँसाते बादल
धुप लगे तो छांव भी करते बादल
प्यास लगे तो बूँदें भी बरसाते बादल
भूख लगती तो झोंका हिलाते
मीठे –मीठे आमों को गिराते
कोन मीठा कोन खट्टा ये काम भी तोते से करवाते
कोन है रस-सा मीठ, ये मार्क भी कोयल से लगवाते
गर्मी से यदि आये पसीना,
पंखा कराते हवा से बादल
कितने भोले-भाले बादल, भालू-बन्दर कि शक्ल से बादल
धरती माँ कहती भाई तुमको, तो मामा लगते मेरे बादल |
बहुत दिन से घर रही हूँ
न खेली न स्कूल गई हूँ
कर दो एक बार फिर से उजाला
थक गई हूँ पी-पी काडे का प्याला
अब इंतजार,न देर करो तुम
इस संकट में ध्यान रखो तुम |
अगर जल्दी न मिटाया डरावना करोना बादल
तो फिर न कहूँगी तुमको अपना प्यारा बादल !
कहती है तुम्हारी ‘शुभी बहना’,
कभी हमको तुम भूल न जाना |
पानी लाकर खूब बरसाना,
कभी हमसे तुम रूठ न जाना ||
कविता :- शुभी राय कक्षा-4, (उम्र 8 वर्ष)
D\O प्रियदर्शनी-मुरारी राय
कक्षा-4,केन्द्रीय विध्यालय ITBP
करैरा, शिवपुरी (म.प्र.)
बाह सिपाही
*बाह रे सिपाही।*
🌱🌱🪴🪴🌱🌱
सुन ओ सिपाही, क्या तूने भांग थी खाई ,
तेरे भी तो पलते होंगे बच्चे और लुगाई ,
क्या गुनाह किया था, जो तुमने लगा दी उनकी ठुकाई,
आजादी को हासिल करने गांधी जी ने भी लड़ी लड़ाई,
ये वर्दी वाले तेरे भी तो लाल रहे होंगे ।
कहीं किसी चौराहे पर खड़े रहे होंगे ।।
तू भी तो कुछ अपनों सा खियाल कर लेता ।।
कहीं भीड़ में न खड़ा हो तेरा खुद का बेटा।
खूब जोर लगाया तुमने जो इन मासूमों को पीटा।
लहू बहा बेगुनाहों का, सड़क पर इनको घसीटा।।
गर नाराज़ है तुम्हारा आका तो क्या निर्दोष को सजा दोगे?
नौजवान रोजी रोटी को मोहताज है, क्या सबको मरवा दोगे?
देश की मिट्टी में शामिल हैं
लहू सूरते हिन्दुस्तान का ,
बाप की जागीर न समझ,
याद रख, क्या हश्र हुआ
सिकंदर महान का।।
@ गप्पी
😂😂😂😂
#hate_mp_police 🚨
शिक्षक की अभिलाषा
शिक्षक की अभिलाषा
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(शिक्षक- समाज को समर्पित कविता)
शीश नवा हाथ जोड़ प्रेम भाव से करता हूं सभी को नमन।
स्वास्थ रखे ईश्वर सभी को, हो जीवन में खुशियों का आगमन ।
हो कल्याण आप सभी का, बच्चे सभी के फूलें फलें।
आएं बहार आपके जीवन में, उन्नति के सभी द्वार खुलें।।
मैं हूं एक साधारण शिक्षक,
करता जन सेवा, पोथी का रक्षक।
सौम्य भाव से सबका आदर पाता,
सब पेट भर खा लें, फिर में खाता।।
आज नए युग में बड़े बदलाव है आए
लोगों ने ना जाने क्यूं कर दिए हमें पराए ।
होता समाज का दर्पण, साहित्य सृजन में।
होता नाव का अर्पण , शांत निर्मल जल में
दिखे शक्ति प्रदर्शन, मेला के समतल रण में,
शिक्षक होता अवश्यकता, जीवन के हर क्षण में।।
जीवन में निराशा छाने लगे, शंका के मेघ मडराने लगें।
याद कर लेना अपने गुरुवर को, संकट सारे टलने लगें।।
देश की तस्वीर बनाते हम शिक्षक,
बिगड़ी तकदीर बनाते हम शिक्षक,
रहती न कहीं कोई कमजोर कड़ी,
अपने सुख चैन का त्याग करें हम शिक्षक।
आज समय की पीड़ा देख कर,
भाव रोक नहीं में पाता हूं।
उमड़ पड़ते है आंशू यूं ही,
दर्द भरी दास्तां सुनाता हूं।
नए युग में कहां से, सुंदर फोन चलन में आ गए।
नई पीढ़ी बरवाद हो रही, उजाले ने आंखो से जा रय।।
बच्चे भूल रहे अपने गुरु जी ,
दिनरात खेलत बिना थके पब जी।
सरकारें नहीं देती शिक्षा निःशुल्क अब हायर ।
युवा पीढ़ी दिन रात खेले फ्री फायर।।
सबसे ज्ञानी गूगल हो गया
बिना गेंद के भूगोल हो गया
भिविषण को कौन पूछता,
भेदी तो ये फोन हो गया।।
साधन नहीं थे आदिकाल में
संघर्ष करते थे हरहाल में
योग्य बने,निरोग रहे चिरकाल में।
खड़ा कर दिया चन्द्रगुप्त कम अंतराल में।।
मेरी महिमा को न विसराओ तुम,
मेरे तप त्याग को न भुलाओ तुम,
बांध रखा है बांध अपने सब्र का ,
न दिखाना ज़ोर अपने उग्र भाव का,
प्रलय को सदा ही मैने अपने आंचल में छिपाया है
निर्माण करने में लगा हूं, नहीं लगता कोई पराया है।।
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स्वरचित कविता
मुरारी राय
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मेरे प्यारे बादल ! कविता - शुभी राय कक्षा -4
मेरे
प्यारे बादल !
बादल ओ! बादल , तुम हो
कितने प्यारे बादल |
कहाँ से आते, कहाँ को जाते नहीं बताते बादल ||
कभी सुख के, कभी दुःख के बादल
जानें कितनों की उम्मीद है बादल
कभी हमें भिगोते, कभी खुद रोते बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कितनी दूरी से चल कर आते
बादल
कभी न रुकते, कभी न थकते बादल
कभी रूठते कभी, ढोल बजाते बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कभी लगते तूफानी, कभी करते शैतानी बादल
कभी बरसाते ओले, कभी पिलाते पानी बादल |
तुम्ही खेती करवाते, जीवों की उम्मीद हो बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कहती है 'शुभी बहना', कभी हमको तुम भूल न जाना |
पानी लाकर खूब बरसाना, कभी हमसे तुम रूठ न जाना ||
कविता :- शुभी राय D\O प्रियदर्शनी-मुरारी राय (शिक्षक)
कक्षा-4, (उम्र 8 वर्ष)
केन्द्रीय विध्यालय ITBP
करैरा, शिवपुरी (म.प्र.)

