Monday, 9 June 2025

मेरे प्यारे बादल

 


मेरे प्यारे बादल !

बादल ओ! बादल , तुम हो कितने प्यारे बादल |

कहाँ से आते, कहाँ को जाते नहीं बताते बादल || 

कभी सुख के, कभी दुःख के बादल

जानें कितनों की उम्मीद है बादल

कभी हमें भिगोते, कभी खुद रोते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |

कितनी दूरी से चल कर आते बादल 

कभी न रुकते कभी न थकते बादल

कभी रूठते कभी ढोल बजाते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |

कभी लगते तूफानी, कभी करते शैतानी बादल

कभी बरसाते ओले, कभी पिलाते पानी बादल

तुम्ही खेती करवाते, जीवों की उम्मीद हो बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |

शक्लें बना-बना चिड़ाते बादल ,

रोने लग जाऊ तो हँसाते बादल 

धुप लगे तो छांव भी करते बादल

प्यास लगे तो बूँदें भी बरसाते बादल

भूख लगती तो झोंका हिलाते 

मीठे –मीठे आमों को गिराते

कोन मीठा कोन खट्टा ये काम भी तोते से करवाते

कोन है रस-सा मीठ, ये मार्क भी कोयल से लगवाते 


गर्मी से यदि आये पसीना,

 पंखा कराते हवा से बादल




कितने भोले-भाले बादल, भालू-बन्दर कि शक्ल से बादल

धरती माँ कहती भाई तुमको, तो मामा लगते मेरे बादल |


बहुत दिन से घर रही हूँ

न खेली न स्कूल गई हूँ


कर दो एक बार फिर से उजाला

थक गई हूँ पी-पी काडे का प्याला

अब इंतजार,न देर करो तुम

इस संकट में ध्यान रखो तुम |


अगर जल्दी न मिटाया डरावना करोना बादल

तो फिर न कहूँगी तुमको अपना प्यारा बादल !


कहती है तुम्हारी शुभी बहना’

कभी हमको तुम भूल न जाना

पानी लाकर खूब बरसाना

कभी हमसे तुम रूठ न जाना ||

कविता :- शुभी राय  कक्षा-4, (उम्र 8 वर्ष)

    D\O प्रियदर्शनी-मुरारी राय 

  कक्षा-4,केन्द्रीय विध्यालय ITBP

करैरा, शिवपुरी (म.प्र.)







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