मेरे
प्यारे बादल !
बादल ओ! बादल , तुम हो
कितने प्यारे बादल |
कहाँ से आते, कहाँ को जाते नहीं बताते बादल ||
कभी सुख के, कभी दुःख के बादल
जानें कितनों की उम्मीद है बादल
कभी हमें भिगोते, कभी खुद रोते बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कितनी दूरी से चल कर आते
बादल
कभी न रुकते, कभी न थकते बादल
कभी रूठते कभी, ढोल बजाते बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कभी लगते तूफानी, कभी करते शैतानी बादल
कभी बरसाते ओले, कभी पिलाते पानी बादल |
तुम्ही खेती करवाते, जीवों की उम्मीद हो बादल
बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |
कहती है 'शुभी बहना', कभी हमको तुम भूल न जाना |
पानी लाकर खूब बरसाना, कभी हमसे तुम रूठ न जाना ||
कविता :- शुभी राय D\O प्रियदर्शनी-मुरारी राय (शिक्षक)
कक्षा-4, (उम्र 8 वर्ष)
केन्द्रीय विध्यालय ITBP
करैरा, शिवपुरी (म.प्र.)

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