Monday, 9 June 2025

मेरे प्यारे बादल ! कविता - शुभी राय कक्षा -4


 


मेरे प्यारे बादल !

बादल ओ! बादल , तुम हो कितने प्यारे बादल |

कहाँ से आते, कहाँ को जाते नहीं बताते बादल ||


कभी सुख के, कभी दुःख के बादल

जानें कितनों की उम्मीद है बादल


कभी हमें भिगोते, कभी खुद रोते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |


कितनी दूरी से चल कर आते बादल

कभी न रुकते, कभी न थकते बादल


कभी रूठते कभी, ढोल बजाते बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |


कभी लगते तूफानी, कभी करते शैतानी बादल

कभी बरसाते ओले, कभी पिलाते पानी बादल |


तुम्ही खेती करवाते, जीवों की उम्मीद हो बादल

बादल ओ! बादल, तुम हो कितने प्यारे बादल |


कहती है 'शुभी बहना', कभी हमको तुम भूल न जाना | 

पानी लाकर खूब बरसाना, कभी हमसे तुम रूठ न जाना ||


कविता :- शुभी राय D\O प्रियदर्शनी-मुरारी राय (शिक्षक)

         कक्षा-4, (उम्र 8 वर्ष)

केन्द्रीय विध्यालय ITBP

   करैरा, शिवपुरी (म.प्र.)

    

 

 

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