जय हो घर वाली मैया की ।।(सभी घर वाली माताओं बहनों को समर्पित )
तुम हम सबको, दुनियां में लाती
तुम हम सबको, पालने में झुलाती
तुम दो कुलों का भवन चमकाती
तुम हम सबका आंगन महकाती।।
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।1।
हम सब तेरे हाथ का खाते ,
फल सब तेरे प्रेम का पाते।
तुम हो सागर, तुम्ही हो धरती,
करती सेवा, कष्टों को हरती।।
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।2।
पत्थर पूजुं या पूजे पूरा पहाड़।
कोई न जानें, काहे करें खिलवाड़।।
तुम हम सबका, जब पेट भराए
भजन की माला तब कोई फिराए।
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।3।
सब कोई सुने, तुम्हारी हरी गाथा।
हम सबकी हो तुम भाग्य विधाता ,
प्रेम भाव से जो कोई तुम्हें मनाता
फिर न कोई दुखड़ा उसे सताता।।
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।4।
मुरख हैं इस जग के कछु प्राणी ,
तुम्हें देखत ही बोलत कटु वाणी
नासमझी से तुम्हे जो कोई हाथ लगावत,
जीवन भर कष्टों की न कोई पीर मिटाबत
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।5।
तुम्हे आजादी कम ही भाती,
में कुल दीपक तुम हो वाती ।
सब जग जाने, फैले जग ख्याति ,
जाकी रोटी खाते सब दिन राती।।
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।6।
तुम ही सबका बंश बेल बड़ाती,
तुम ही हमको सद मार्ग चड़ाती।
अपने दुखड़े तुम लो छुपाती,
सबको मनाती, खूब हंसाती।।
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।7।
काल भी उसका कछू न करता
जो कोई शरण में तुम्हारी रहता
तुम हो सवरी ,तुम्ही अनुशुईया
तुम हो सावित्री, तुम्ही सीता मैया
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।8।
जय हो माता , जय हो भगनी,
जय हो बेटी , जय हो धरणी।
जय हो देवी, जय मंगल करनी,
जय हो भार्या, जय जग जननी।।
घर वाली मैया की, जो जन सच्ची सेवा करता ।
जीवन जी भर जीता, फिर वो बैकुंठ को टरता।9।
ऐसी घर वाली मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।
बार बार प्रणाम,मैया तुम्हें बार बार प्रणाम।।
(घर का अर्थ साधारण घर से नहीं है, अपितु संपूर्ण विश्व को ही घर मान लिया है)
दिनांक 09/06/2021 दिन बुधवार
आपका
मुरारी लाल राय ' गप्पी '
शिक्षक