Sunday, 16 March 2025

होली पर्व मनाऊं कैसे!

 होली के रंग लगाऊं कैसे !


ऋतु वसंत के फूल झड़े तो

फिर पलाश रंग ले आता है

बिखर गए हैं संगी साथी मेरे

पत्तों का मेल मिलाऊ कैसे 

होली के रंग लगाऊं कैसे 


सूनी रहती गप्पें चौपालें

दूरों से नजदीकी पालें

सूनी रहती टप्पें गौपालें

दूरभाषी लत छुटाऊं कैसे 

होली पर्व मनाऊं कैसे


खेतों में रसायन पेल रहे  

अन्न में कसायन मेल रहे

रामसर में जलकुंभी फैल रही 

मिट्ठी को दोष लगाऊं कैसे 

होली को जोश बनाऊं कैसे !


मन मंदिर में भेद भर रहे

मठ मंदिर में कैद कर रहे 

रंग कंदिर से छुड़ाऊं कैसे

राष्ट्रवाद सी होली मनाऊं कैसे 

होली के रंग लगाऊं कैसे !


आधुनिकता की रंगत हाली में 

मूरखता की संगत थाली में 

द्वेष स्वार्थ की फंगत हाली में 

रंग केसरी सब पर चढ़ाऊं कैसे

होली के रंग उड़ाऊ कैसे !

होली के रंग लगाऊं कैसे !


मुरारी लाल राय गप्पी 

होली मुबारक हो