छोटी सी गलत फहमी,,।
अच्छे अच्छे रिश्तों को उखाड़ सकती हैं ये ग़लत फहमियां।
जरा सी चूक क्या हुए , नजरों से गिरा सकती हैं गलत फहमियां।।
लौट कर कोई नहीं पूछेगा , असल बात क्या थी।
लोग कट कर देते है डोर , मगर बात क्या थी।।
वर्षों लगे थे गुलशन को सजाने में , एक तूफान सा आया मेरे घराने में ।
अक्सर आग लगते फिरते लोग, तुम देर न करना उसे बुझाने में ।
जब घर अपना है, बर्तन भी खनकते होंगे ।
कोई गिरा न दे उन्हें, चाबी रखो सिरहाने में ।।
बेवजह डांट दिया, परायों के बहकावे में ।
घर मेरा उजाड़ दिया, झूटों को मानने में।।
गर प्रेम है तो क्रोध बाजिव है, अपनों को समझाने में।
पर कुछ वक्त तो देना था, हमें अपनी बात बताने में ।।
में लाख बुरा हूं, पर साफ़ तुम भी नहीं ।
फरमान सुनाया है,पर फरिश्ते भी नहीं।।
रिश्ते नाते प्यार वफ़ा, कनकों सी माला।
कहीं कुतर न दे, गलतफहमी की ज्वाला।।
रिश्तो को मिटा सके, ताकत कहां ज़माने की ।
न आने देना फहमी, लो कसम इन्हें निभाने की।।
रिश्ते हैं सच्ची पूंजी,कभी उसे न गवाँ देना ।
धीरज धरना ,अपनों से रिश्ते निभा लेना।।
आपका
मुरारी लाल राय
शिक्षक
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