Friday, 28 May 2021

करैरा..... मेरा नाम! कविता मुरारी लाल राय

 


करैरा..... मेरा नाम! कविता मुरारी लाल राय

करैरा मेरा नाम साथियों, कुछ ऐसा ही है काम।

कच्ची मेरी गलियां, पल भर में लग जाते है जाम।।


फूटा है तालाब मेरा , अधूरा रहता हर काम ।

सेर सपाटा करने जाएं, मंडी सुबह और शाम।


ऊंची है पालिका मेरी , ऊंचा ही है नाम।

चांद है दरवाजा मेरा , चांदनी सी है शाम।।


किला है पुस्तेनी मेरा, शिव जी का है धाम ।।

बगीचा मेरे बाबा बैठे, सब भजत हैं सीता राम।।


राम मंदिर की चाय सुहानी , बल्ले के समोसे। 

काली माता पर हाट सजती, चौबे के रसगुल्ले।।


सतीश जी सुनाएं कविता,योगी जी बहाते स्वर सरिता।

भारती वीर रस के ज्ञाता, बाजपेई सुनाते मधुर कविता।।


महुआर सी भाग्य रेखा मेरी, कहीं साफ तो कहीं मैली।

तिब्बत से लाया हूं प्रहरी, दूर दूर तक सीमाएं फैली।।


सब जन सेवा भाव से रहते, बदलाव की बात न कहते।

अपनी प्यास आप बुझाते, रॉब दिखाता नेता न सहते।।


भानगिर की तपोभूमि है ये, सदा भरी रहे झोली मेरी ।

सुख भरा हो जीवन सबका, इतनी सी है विनती मेरी ।।


कविता -: मुरारी लाल राय 'गप्पी' 

                   शिक्षक

करैरा का निवासी- करेरिरांस kareraiyansh 

9 comments:

  1. Nice ����

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  2. बहुत सुंदर चित्रण किया भैया जी, कभी मौका मिलेगा तो आपके काव्यपाठ में अवश्य सामिल होंगे।

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  3. This comment has been removed by the author.

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  4. आप अपनी पुस्तक निकाल दीजिये सर
    😘😘🥰

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