अपने मन को सुनें!
समय और पैसा हमारे हाथों से बहुत जल्दी बिना कहे निकल जाते है। अंतर इतना है के पैसा फिर से प्राप्त हो सकता है किन्तु समय नहीं ।
जी हां हम सभी जानते हैं कि को मैने लिखा ये कोई नया अनुभव या तर्क नहीं , ये तो वर्षों से चला आ रहा एक व्यंग्य है । पर कुछ व्यंग हमें बहुत कुछ सीखा सकते हैं। मुझे भी बहुत कुछ सिखा गया ये लॉकडाउन। पैसे कम हो तो बहुत चतुराई से इसे उपयोग करना चाहिए। ठीक उसी प्रकार जब आपके पास समय अधिक हो तो भी बहुत समझदारी से काम चलाना चाहिए । वर्तमान महामारी के संकट काल में हमारे पास समय ही सबसे बड़ी पूंजी है। अतः यदि समय की इस बहुमूल्य पूंजी को हम अपने विवेक से अधिक लाभ हेतु उपयोग कर सकें तो इससे अधिक उपयोगी कोई दूसरा काम नहीं हो सकता ।
समय को उपयोगी बनाने हेतु मेरे पास कुछ सुझाव है शायद आपको पसंद आए-
01 चिंतन
02 मनन
03 विश्लेषण
04 आगामी प्लांनिंग।
05 आत्म संतुष्टि ।
01 चिंतन -
व्यस्त समय में चिंतन करना कठिन कार्य है क्योंकि समय से सभी कार्य पूर्ण करने हेतु हम सदैब व्यस्त रहते है और अपने स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पाते। अब जब समय पर्याप्त मिला है तो सबसे पहले हमें चिंतन का प्रयास करना चाहिए। हो सकता है किसी कार्य को पूर्ण करने हेतु जाने अनजाने में कोई भूल चूक हो गई हो किन्तु हम इतने व्यस्त रहते थे कि अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने का प्रयास करने हेतु उचित चिंतन नहीं कर सके। अतः अब अपने बीते दिनों के कार्य व्यवहार पर चिंतन करना चाहिए। चिंतन करना आसान काम नहीं हो सकता। इसके लिए आपको पूर्ण समर्पण भाव रखना चाहिए। बिना समर्पण भाव आप अपने कार्य व्यवहार पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं कर सकते। आपको सदा स्मरण करने रहना चाहिए कि इस संसार में पूर्ण कोई नहीं । कमियां या गलतियां हर किसी से होती है अतः हमसे भी बहुत हुए है ।किन्तु क्या हम अपनी कमियों को स्वीकार कर सकते हैं। अगर हम अपनी इन कमियों को स्वीकार कर लें तो फिर हमारे लिए चिंतन बहुत ही सरल और उपयोगी हो जाता है । चिंतन का आशय आप समझ ही गए होंगे। हमसे जाने अनजाने में को कुछ भी गलतियां , कमियां होती है उन सब पर पुनः स्मरण शक्ति से विचार करना और आने वाले समय में इन सभी को ना दोहराने का संकल्प लेने हेतु किया गया प्रयास ही चिंतन है ।
02 मनन
मनन भी चिंतन से जुड़ा हुआ दूसरा उपयोगी कार्य है जिसे हम अपने लॉक डाउन में कर सकते हैं । वैसे तो यह चिंतन का ही रूप है, किन्तु इन दोनों में अंतर इतना ही है कि चिंतन बीती बातों को स्मरण कर, कमियों को स्वीकार कर आगे भविष्य में इसे न दोहराने से है, किन्तु मनन इन कमियों को दूर करने हेतु बनाए गए उचित समाधान से है। कमियां तो सदैव हमारे में रहनी है किन्तु उनकी पहचान हम कर सकते हैं। उन्हें पहचानने और उन्हें दूर करने हेतु उचित कार्य योजना बनाने का प्रयास करें , मनन करें । मनन करने से हमें अपने कार्य व्यवहार में परिवर्तन लाने का उचित मार्गदर्शन मिलता है। व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा स्वयं निर्मित करता है। अतः हमें अपने जीवन में अपने लिए पुरानी जीवन शैली पर चिंतन व मनन अवश्य करना चाहिए।जिससे हम आने वाले समय को अधिक महत्वपूर्ण बना कर सांसारिक सुखों का आनंद ले सकें।
03 विश्लेषण
चिंतन और मनन से ही जुड़ा हुआ है विश्लेषण । जब हम अपनी कार्यशैली में सुधार हेतु मनन कर रहे होते है ठीक उसी समय समस्या के निस्तारण की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं। हम जब भी किसी दुविधा का सामना कर रहे होते है तो ऐसे समय समस्याओं से निजात दिलाने वाले विश्लेषण जो हम पहले ही कर चुके हैं का सहारा लेकर उस समय की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं। जो गलती पहले किसी कारण वश हो गई थी,अब नहीं होगी । क्योंकि हमने पहले से अपने आप को ऐसी स्थिती से अपने आप को सुरक्षित रखने हेतु तैयार कर लिया है।
04. आगामी प्लांनिंग
आने वाले समय में चिंतन और मनन एवम् विश्लेषण से प्राप्त अनुभव बहुत काम आता है। समस्याएं सदैव चुनौती बन कर सामने आती रहती है लेकिन यदि हमने पहले आई समस्याओं से जूझ कर चिंतन, मनन व विश्लेषण कर लिया है तो फिर अब जब भी कोई नई या पुरानी समस्या आ खड़ी होती हैं तो अब आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। जैसे टीका लगाकर उस रोग से मुक्ति मिल जाती है,ठीक उसी प्रकार आगामी प्लानिंग के द्वारा भविष्य हेतु तैयार हो सकते है।
समस्याएं स्वास्थ्य एवं आर्थिक दोनों को समान रूप से कमजोर कर सकती है जैसा वर्तमान संकटकाल में हम अच्छे से देख चुके हैं। अतः यदि फिर से कोई संकट काल का सामना करना पड़ा तो हमें स्वास्थ्य और आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहिए। इसलिए हमारी आगामी प्लांनिंग में आई सब बातों का ध्यान रखा जाए कि यदि कोई नई या पुरानी समस्या आ खड़ी हो तो हम उसके मुकाबले हेतु तैयार रहें ।
05 आत्म संतुष्टि
ऊपर वर्णित चारों उपायों को अपनाकर हम अपने जीवन काल में सदैव आत्म संतुष्टि का अनुभव करेंगे। जैसे टीका लगाकर आप निश्चिंत हो जाते हैं। ठीक उसी प्रकार चिंतन , मनन, विश्लेषण और प्लानिंग से अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं। हम भविष्य की किसी भी पड़ाव पर चिंता नहीं करेंगे । हम सदैव आत्म संतुष्टि मिलती रहती है कि हमें किसी भी समस्या से डरने की आवश्यकता नहीं है। तो फिर आप अपने बहुमूल्य समय का भरपूर आनंद लें सकते हैं।
चिंता तो करनी ही पड़ेगी परंतु यदि ऊपर वर्णित पांचों उपाय अगर आपने अपना लिए तो फिर अब आपको सोचना या चिंता करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जी हां मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि जो व्यक्ति अपनी नजर और नजरिया ज़मीन से जोड़कर रखता है उसे आप कभी किसी बात के लिए परेशान होते नहीं देखेंगे । ऐसे व्यक्ति अपने जीवन से ही स्वयं प्रेरणा लेते हैं। व्यक्ति का मन उसका सबसे बड़ा मित्र ओर मार्गदर्शक है अतः हमें मन के इशारों को समझना होगा एवं उसी के अनुशार अपने कार्य व्यवहार को स्वीकार करना चाहिए।
(कहानी का अगला भाग शीघ्र ही आप सभी तक पहुंचा दिया जाएगा)
आपका
मुरारी राय
शिक्षक

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