Tuesday, 11 May 2021

आह! मेरी सेलरी सहेली

 


आह! मेरी सेलरी सहेली

पूरे महीने बाद है आती, सज धज के खाते में सहेली  /


ऐसा लगा अब तो ह्लः  होगी घर के खाने की पहेली  //


सैलरी एक ऐसी ठिठोली  /

आशयों की है  हमजोली  //


नजर पड़ी जब सूनी कलाई पर  /

बहन मांगे मोबाइल ‘राखी’  पर  //


भाई जो हूँ  कमी कैसे करू इस अवसर पर  /

फिर न लगने पाए दोष, कंजूस ‘मास्टर’  पर  //


धीरे से भाई बोला भैया क्या गाड़ी का पेट भरा दिया?  /

हक़ से ‘प्रिये’ बोली ‘कार्ड’ दो, साडी लेने को लेट करा दिया  //


सहेली के  टुकड़े कैसे करुं  /

पिछली EMI कैसे भरू  //


अश्रु डाल दिए सहेली ने जब कांपती आवाज दी सुनाई  /

वेटा बहुत दर्द होवे जोड़ों में, कब तक लायेगा मेरी दवाई  //


टूशन से जब लौटा  वेटा, बोला रोते हुए रखकर थेला |

अब तो तरश करो पापा, फट गया पेंट और फट गया लंगोटा  //


वाल सखा  ने हालत देख,  मार लिया जब ताना  /

‘मास्टर’ चीश होते हे, इन्हे खर्च करना नहीं आना  //


सहेली बोल उठी पीछे से, अब और न चिथड़ा करो  /

कुछ तो बचने दो खाते में, कुछ तो इसमें छोड़ा करो  //


रात हुई निंदिया भी मांगे, सोने को कमरा ‘ठंडा’ /

कट रही जिंदगी तंगी में , चले न हमारा कोई ‘धंधा’  //








रात चांदनी आकर  बोली “सो जा प्यारे ,

 बरना यूँ  फ़िक्र में लगा ना लेना फंद  /

इतना ही था तुम दोनों का सांग”  //


फिर  आएगी एक दिन सैलरी तब तक तू धीरज धरना  /

कट जाएगी हर मुसीबत, अब कभी न ‘नीरश’ रहना //


कम खा-गम पी ले, नहीं मिलती अब पुरानी पेंशन  /

शांति से काटे  जिंदगी , कभी ना ले मुरारी टैंशन  //


मंगलवार, 11 मई 2021 |   

स्वरचित कविता :- मुरारी लाल राय

माध्यमिक शिक्षक

शास. मॉडल स्कूल करेरा जिला शिवपुरी (म.प्र.)

Mob. 917976550

0

No comments:

Post a Comment