Tuesday, 18 May 2021

विज्ञान किताब नहीं सोच होती है !

 


विज्ञान किताब नहीं सोच होती है !

जी हाँ, एक वार फिर से आया हूँ अपनी अनोखी गप्प के साथ | आज की गप्प नहीं बल्कि विज्ञान के मूल तत्व के साथ मेरा लम्बे संघर्ष का लेखा जोखा है | साथियों जब आठवी कक्षा में पढाई कर रहा था | उस समय लोकप्रिय धारावाहिक ‘शक्तिमान’ टीवी पर आता था | होस्टल जीवन में टीवी देख पाना कहाँ सम्भव है किन्तु ऐसा एक भी एपिसोड नहीं होगा जिसे पूरा न देखा हो | मेरे सहपाठी मेरी इस हरकत के लिए मुझे इस धरबाहिक का बिलन डाँ जेकोल ! बुलाया करते थे | ऐसा इसलिए नहीं होता था की मुझे धारावाहिक पसंद था किन्तु इसलिए कि मेरा विज्ञान को समझना अलग ही ढंग से होता था | में विज्ञान को विषय से अधिक एक नई सोच और अवसर के रूप में देखा था |

विज्ञान की हमारी टीचर सरोज कामले मेम थी| बे बहुत ही शांत और सलीन नेचर बाली थी | उनके विज्ञान पढ़ाने के तरीके मूझे सदैव नए नए ‘अनोखे’ प्रश्न पूंछने को प्रेरित करते ... किन्तु प्रश्न अट पटा होने पर हर बार बिना जवाब मिले ही बेठा दिया जाता | दोस्तों आज जब इस महामारी में अपने आप को इस संकट में निशस्त्र देख कर याद आता है अब मेरे अन्दर का विज्ञान कहा गया?, डॉ.जेकल कहाँ है जो हर संकट के लिए विज्ञान के नये नये चमत्कार करता रहता है | जिसके पास हर समस्या के लिए कुछ न कुछ समाधान अवस्य होता है | इसी प्रेरणा से जिसे बहुत पहले मेने अपनी डायरी में भी लिखा था आज की परिस्थिति में उपयुक्त जान कर आज का लेख आप सभी की सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ |

में धार्मिक प्रवृत्ति का रहा हूँ , ये गुण मुझे अपने दादा जी से मिला है | वे बहुत धार्मिक यात्रायें किया करते थे | वे बहुत सी धार्मिक पुस्तकें घर में ले कर आते थे | इन्ही धार्मिक पुस्तकों से बहुत कुछ सीखने को मिला | जब जाना की सृष्टि को ब्रह्मा ,विष्णु,और महेश तीनों देवों ने बनाया है तो मेरे लिए विज्ञान की टेबल याद करना फिजूल सा लगता था | जब सब कुछ देवता ही करते है तो में इस तत्वों की तालिका को क्यों याद करूँ | भगवन के साथ साथ मुझे विज्ञान पर भी  पूरा भरोसा था तो मेने विज्ञान के इन्हीं तत्वों को भगवान समझ लिया | आज का लेख मेरी इसी नादानी पर आधारित है |

धर्म के अनुसार हमारी रचना भगवान ब्रह्मा जी ने की है | हमारा पालन विष्णु जी करते है | सुरक्षा का कार्यभार भगवान शंकर जी को मिला है | विज्ञान में भी ऐसा ही दृश्य देखा जा सकता है ! निर्माण का कार्य कार्बन(C) करता है | पालन करना ऑक्सीजन (O) तत्व का काम है | और सुरक्षा का काम हाइड्रोजन (H) को मिला है | तो क्या में ये कह रहा हूँ, कि COH देवता है ! जी हाँ मेरे लिए तो कण-कण देवता है आप अपना अनुमान जेसा लगाना चाहें लगाएं | आपकी आशंकाओं को भी भली भांति समझ रहा हूँ | किन्तु में अपनी व्याख्या (जिसे आप आप गप्प समझते है) से आपको संतुष्ट कर दूंगा की में भी , आप भी निर्माण कार्य कर सकते है ! 

कार्बन (Carban):-

      कार्बन एक ऐसा तत्व है जो सभी जीवों बस्तुओं और चर-अचर, द्रश्य-अद्रश्य पदार्थों का मूल तत्व है |  इसका गुण है की ये अपने चारो दिशाओं में  जितनी चाहे लंभी श्रखला या बेल का निर्माण कर सकता है | सबसे पहले ये अपने जैसे ही तत्वों से जुड़कर हीरा और ग्रेफाइड दो तत्वों का निर्माण करता है | ब्रह्मा जी भी चार मुख बाले है और उनके द्वारा भी सर्वप्रथम देवता और राक्षस को बनाया गया और फिर सबकी लम्बी लम्बी बेल आगे तक बढ रही है | गुणों की तुलना करेंगे तो ये दोनों का रूप रंग मेरी व्याख्या हेतु उपयुक्त होंगे | देवताओं के बारे में कहा जाता है की ये बहुत सुन्दर शरीर बाले गुणवान होते है | हीरा भी उसे ही कहा जाता है जो सुन्दर और गुणवान हो ! ग्रेफाइट काला रंग का होता है जो दूसरी रचना की विशेषता बतलाता है | जिस प्रकार ब्रह्मा जी सृष्टि का आधार है | ठीक उसी प्रकार कार्बन भी सभी बस्तुयों जीवों का आधार है | अगर नहीं होता तो जब जीव या वस्तु को जला दिया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है तो शेष के रूप में यही कार्बन ही बचता है| अतः आप मेरे इस तर्क से अब सहमत होंगे कि विज्ञान के तत्व भी कमाल कर सकते है|

ऑक्सीजन (O)

      ऑक्सीजन से ही सम्पूर्ण जगत अपना अस्तित्व बनाये हए है | कल्पना कीजिये की यदि O न होती तो क्या हम और अन्य जीव जीवित रह पाते | जैसे धर्म ग्रन्थ भगवान विष्णु जी की महिमा का गुण-गान करते है ठीक उसी प्रकार हम ऑक्सीजन को प्राणवायु कहते है | श्रष्टि में विष्णु जी को पालन करता कहा गया है | ऑक्सीजन तत्व भी सभी के पालन का कार्य निरन्तर करता रहता है | विष्णु जी को तीनों लोकों का स्वामी कहा जाता है ऑक्सीजन भी अपने तीन अणुओं के साथ मिल कर ओजोन गैस का निर्माण करता है | जिससे सूर्य की हानिकारक किरणों से श्रष्टि का पालन प्रभावित हुए बिना निरंतर चलता है |  आपने श्वशन किर्या को पढ़ा होगा | कितना सरल और साधारण सी प्रक्रिया है प्राणवायु नाशिक दुआर से अन्दर जाती है और अंदर के मृत कार्बन या शेष रहे कार्बन को अपने साथ बहा लाकर पर्यावरण में मिला देती है | यही प्राणवायु जब शरीर में अन्दर प्रवेश कर समस्त कोशिकाओं तक पहुच कर सबका पालन पोषण करती रहती है | येसी ही तो श्रष्टि की रचना का नियम है की विष्णु जिन्हें राम तत्व भी कहा जाता है, यही तत्व जीवन आधार है जिससे समस्त जीव अपने अस्तित्व को बनाये हुए है |

ऑक्सीजन तत्व का एक और महत्वपूर्ण कार्य है पोषणाहार पकाने हेतु अग्नि प्रजुलित करना | इसके बिना पोषणाहार तैयार कर पाना सम्भव ही नहीं | चाहे फिर पेड़ पोंधों को भी अपना भोजन क्यों न बनाना हो | विष्णु जी समय समय पर अपने अवतारों से मानवता की रक्षा करते रहते है तो उसी प्रकार ऑक्सीजन भी दवानल बन कर रक्षण का काम करती है |  

हाइड्रोजन (H)

      भगवान शंकर को तीनों देवों में सबसे सरल और भोले भाले देव मना जाता है |इन्हें श्रष्टि के रक्षा का कार्य सोपा गया है | ठीक उसी प्रकार हाइड्रोजन हमारी विज्ञान तत्व तालिका में सीधा सादा तत्व है | अणु क्रमांक भी एक ! खाली स्थान भी एक | ये देखने में जितना सरल और शीधा है, कभी कभी अपना वस्तविक खतरनाक रूप भी दिखा सकता है | ये ऑक्सीजन के साथ मिलकर जल का निर्माण करता है जो जीव जंतुओं के प्राणों की रक्षा करता है |  कार्बन के साथ मिलकर असंख्य हाइड्रो-कार्बनिक योगिकों का निर्माण करता है | और यदि गलती से भी इसे छेड़ दिया जाए तो ये हाइड्रोजन बम बन कर विनाशकारी भी बन सकता है |

      अतः आप सभी अब तीनों तत्वों और तीनों देवों को समतुल्य मानने हेतु अपनी स्वीकृति दे सकते है | हमरा विज्ञान कोई कागज पर लिखा गया थोता ज्ञान नहीं है अपितु यह तो ईश्वर की बनाई रचना का ही अध्यन करता है | समझदार पत्थर में भगवान देखते है और नासमझ इसमें पाखंड| सब अपने अपने चक्चुओं के प्रकश के कारन होता है | विज्ञान अभी तक 108 से ज्यादा तत्वों की खोज कर सका है | तो क्या इन तत्वों को ईश्वर मनलेना गलत है | हम जल वायु भूमि पेड़ वनस्पति समस्त तत्वों का आनंद लेते है और इनका उपयोग भी करते है | तो क्या हमारा समर्पण प्रेम और श्रद्धा ईस्वर की भांति इन इस्वरिये तत्वों के प्रति नहीं बनती |

आज जब महामारी के कारन हमने प्राणवायु की कमी से अपने अधिकांश साथियों को खो दिया है | धन्य है विज्ञान , जिसने अपने ज्ञानभण्डार से प्राणवायु देने बाले छोटे छोटे यंत्रों का निर्माण संभव किया है | आज में भी अपनी अटपटी गप्पों से आने वाले युग में अत्यंत अवश्यक पड़ने बाले उपकरण की रूप रेखा का वर्णन करने का प्रयाश कर रहा हूँ |

      जिस प्रकार एक व्यक्ति खाने पीने की समस्या से ग्रसित हो तो उसे हम ग्लूकोज के सहयोग से जीवित रखने में सफल होते है | मेरी आज की खोज कहूँ या कल्पना इसी ग्लूकोज के निर्माण हेतु छोटे छोटे उपकरण के निर्माण करने से है | ग्लूकोस जिसमें कार्बन के 6 अणु , ऑक्सीजन के भी 6 अणु तथा हाइड्रोजन के 12 अणुओं का यौगिक होता है | ये तीनो ही तत्व स्वतंत्र अवस्था में पर्यावरण में उपलब्ध है | हम इन C, H व O को क्रिया कर ग्लूकोज बना सकते है | और यदि हम विज्ञान के ज्ञान और ईश्वर के आशीर्वाद से ऐसा कर पाए तो संकट के इस समय घरों में  भूखे सो रहे अपने गरीब लोगों तक जीवन बचाने का साधन पंहुचा सकते है | और किसी का जीवन बचाना हजार यज्ञ के फलों के बराबर है |

COH  जिनकी बिस्तृत चर्चा में पहले ही कर चूका हूँ के ये तत्व विज्ञान के नहीं स्वयं ईश्वरीय तत्व है जिससे सम्पूर्ण सृष्टि का निर्माण एक बार क्या- कई बार किया जा सकता है | इनके ऊपर ही सम्पूर्ण जगत का पालन पोषण , सुरक्षा और जीवन का आधार है | अतः हमें ऐसे दिव्य तत्वों को पहचाना चाहिए एवं इनके उपकार को नहीं भूलना चाहिए |  COH से ग्लूकोस बनाने के उपकरण का निर्माण करने का में भी प्रयास कर रहा हूं , आप भी करें | ये तो ईश्वर ही जाने कौन भागीरथ बनेगा किन्तु अगर हम ऐसा करने में सफल हो गये तो ईश्वर अवश्य मान लिए जायेंगे |

धन्यवाद

आपका 

मुरारी लाल राय ‘गप्पी’

शिक्षक  

 

 


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