शीर्षक:- ऑनलाइन शिक्षा की प्रभावशीलता |
प्रस्तुति:- मुरारी लाल राय शिक्षक
||श्री गणेशाय नमः ||
भूमिका:-
बढ़ती जनसंख्या को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण कार्य है । वर्तमान कोविड-19 महामारी के चलते शिक्षा देने की हमारी वर्षों पुरानी शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है | इस बदलते परिवेश में पारंपरिक तरीकों से इसे संचालित रखना मुमकिन नहीं| हमने सदियों बाद ऐसी आपदा को देखा है | मेरा मानना है की यदि समस्याएं चुनौती वन कर आती है तो समाधान का सूरज भी अवस्य उद्दित होता है | कोविड -19 महामारी के आने के पहले हुए अविष्कार आज हमारे लिए आशाओं का सूरज बन कर ज्ञान का प्रकाश दिखाने आया है | इंटरनेट, स्मार्ट फ़ोन और उसके महत्त्व से हम सभी भली-भांति परिचित है, किन्तु आज ये मनोरंजन के साधन ही हमारे लिए उपयोगी संसाधन बन गये | नवीन तकनीक साधनों का निर्माण तो हुआ पर पारंपरिक मानसिकता से ग्रसित होने से समाज ने नए विचारों एवं नए साधनों का उपयोग कम ही किया |
सभी को शिक्षा उपलब्ध कराना शासन की समस्याओं की सूची में प्राथमिक क्रम पर दर्ज है । शिक्षा में तकनीक व नवाचारों की उपयोगिता सदा से रही है। हमें इन आविष्कारों व नवाचारों का प्रयोग एक क्रांति के समान करना चाहिए। जिससे समस्याओं पर विजय प्राप्त की जा सके | किन्तु परिवर्तन लाने हेतु जिम्मेदार जनों ने अपने तर्कों से इस नवाचार को स्वीकार्य ही नहीं किया| सभी परिवर्तन की मांग करते है किन्तु कोई परिवर्तन लाने स्वयं आगे नहीं बढ़ता । और यदि कभी ऐसा करने हेतु आदेशित किया जाए तो वे बगलें झांकने लगते है।
अब प्रश्न समस्या के निस्तारण का कम ओर परिवर्तन हेतु समाज को तैयार करने का अधिक है । क्योंकि तकनीक कितनी भी अच्छी से अच्छी निर्मित होती हैं किन्तु इसे स्वीकार करने वाले, उपयोग करने वाले व्यक्ति यदि अपने कार्य व्यवहार में परिवर्तन लाने हेतु स्वयं को समर्पित करना होगा | वर्तमान संकटकाल यदि न भी होता, तब भी हमारे लिए अपनी विशाल क्षेत्र और जनसंख्या के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साधन जुटाने का प्रबंध करना ही चाहिए । हमारी सरकार द्वारा पहले भी दूरस्थ शिक्षा , रेडिओ शिक्षा , दूरदर्शन प्रसारण आदि से जन मानस तक शिक्षा पहुंचाने के कार्यक्रम संचालित किये है|
भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में आर्थिक संसाधन सीमित है ।एवं उससे भी सीमित है सरकारों का शिक्षा के प्रति समर्पण भाव। नवाचारों को लागू करने के लिए आर्थिक संसाधनों के साथ साथ उनके प्रति हमारा समर्पण भाव होना भी बहुत आवश्यक है। यदि समर्पण भाव नहीं है तो फिर इन नवाचारों को बोझ मान कर दरकिनार कर दिया जाता है। ऑनलाइन शिक्षा वर्तमान संकटकाल में एक आशा की किरण लेकर आया है । जिसमे सभी को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की अपार संभावनाएं हैं। किन्तु संभावनाएं के दम पर जंग नहीं जीती जा सकती । ऑनलाईन शिक्षा के उपयोगी बनाने हेतु हमें विभिन्न क्षेत्रों में कई मूलभूत परिवर्तन लाने होंगे । साथ ही साथ पारंपरिक शिक्षा पद्धति के स्थान पर आधुनिक युग में कारगर ओर उपयोगी शिक्षा पद्धति को सहर्ष स्वीकार करना होगा । एवं तकनीकी साधनों से जुड़ाव एवं तकनीकी संचालन हेतु कौशल को अंगीकार करना होगा। जिससे देश के युवा शक्ति हेतु तैयार किए गए इन ऑनलाइन शिक्षा साधनों से लाभान्वित किया जा सके।
ऑनलाइन शिक्षा की उपयोगिता के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करते हुए विस्तार पूर्वक वर्णन इस शोध पत्र में किया गया है। शोध पत्र पढ़ कर संभवतः आपकी विभिन्न आशंकाओं का समाधान होगा एवं तकनीकी संचालन करने हेतु नए विचारों, नवाचारों से परिचय भी होगा। आप सभी की सेवा में अपना पहला शोध-पत्र ‘ऑनलाइन शिक्षा के उपयोगिता’ प्रस्तुत कर रहा हूं । आशा है आपका आशीर्वाद सदैव मुझे मिलता रहेगा |
06. ऑनलाइन तकनीक परिचय व संभावित लाभ –हानि :-
“शिक्षण जगत में बढ़ रही अनेक समस्याओ पर अगर गंभीरता से बिचार किया जाए तो प्रमुख कारण यही द्रष्टिगोचर होता है की कही कुछ टूट गया है |शिक्षक जो आज वेतनभोगी द्रोणाचार्य के रूप में उभरता हुआ वर्ग है| वह अपने ज्ञान को छात्रों को बिना किसी तर्क के उसे स्वीकार करने को ही अनुशासन और ज्ञान प्राप्ति का एक मात्र मार्ग समझता है | उसके सामने कोई प्रश्न पूछ्लेना या किसी तथ्य के तर्क पर जानकारी मांगना उसे अपनी तोहीन लगती है |”
(संधर्भ-पुस्तक ‘संबाद की तलाश’ –क्षमा चतुर्वेदी )
ऑनलाइन शिक्षा से संभावित लाभ
· ऑनलाइन शिक्षा ऑफलाइन शिक्षा की तुलना में 53% सस्ती है।
· यह समय, पैसा और ऊर्जा बचाता है।
· इसके माध्यम से आप घर बैठे प्रभावी जानकारी का प्रसार प्राप्त कर सकते हैं।
· शारीरिक रूप से अक्षम लोग आसानी से ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से डिग्री प्राप्त कर सकते हैं और अपना करियर बना सकते हैं।
· ऑनलाइन शिक्षा चैट रूम, ऑनलाइन फ़ोरम और ई-मेल जैसे लाइव क्वेरी समाधान प्रदान करती है।
· ऑनलाइन डिप्लोमा कोर्स के माध्यम से छात्र अपनी योग्यता बढ़ा सकते हैं और अपने करियर के अवसरों को बढ़ा सकते हैं।
(सन्दर्भ : इन्टरनेट पर उपलब्ध जानकरी)
ऑनलाइन शिक्षा से संभावित हानि:-
online शिक्षा पद्धति समय की आवश्यकताएं पूरी करता है। किन्तु आज एक समस्या समाप्त नहीं होती एक नई समस्या जन्म ले लेती है। आप किसी भी रूप में देख सकते है कि हमने एक समस्या को हल करने के उपाय निकले ही थे कि नई नवेली समस्या आकर दरवाजे पर दस्तक देने आ खड़ी होती है। online शिक्षा पद्धति से इस महामारी में कुछ मदद तो हुए हैं किन्तु बहुत सी समस्याएं भी उभर कर सामने आ रही हैं जिन पर विचार कर लेना उचित होगा ।
01 सामाजिक व्यावस्था पर प्रभाव
ऑनलाइन शिक्षा पद्धति महंगे साधनों से ही प्राप्त होती है किंतु हम सब जानते है कि ये महंगे साधन जुटा पाना सभी के लिए संभव नहीं ,अतः सभी को समान रूप से शिक्षा उपलब्ध कराना संभव नहीं । जिससे प्रतिभाओं के साथ भेदभाव होने से ये आपसी विश्वास और समर्पण भाव में दीवार निर्माण करता है जिससे आर्थिक रूप से सक्षम और कमजोर वर्ग के बीच आपसी रंजिश जैसा माहौल बनता हैं, जो अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है।
02 स्वास्थ पर प्रभाव
प्रति दिन चार घंटे से अधिक समय तक ऑनलाइन संसाधनों से शिक्षा लेने हेतु बैठे रहने से युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर पड़ता है, क्योंकि तकनीक के अपने लाभ है पर हानि भी कम नहीं है। आज कम उम्र के बच्चों के सिर में दर्द रहना , आंखे कमजोर होना , गर्दन पर दबाव रहना , मानसिक तनाव से चिड़चिड़ापन , माइग्रेन , एलर्जी आदि प्रमुख समस्याएं सदैव चुनौती बन कर सामने आती रही है।
03.आर्थिक संसाधन सीमित होना ।
ये बात किसी से छिपी नहीं है कि देश का 70% से अधिक किसान सीमांत कृषि भूमि पर कार्य कर अपने परिवार का पालन पोषण करता है, अतः महंगे साधनों के अभाव में वह अपने बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है ।इस तरह अधिकांश लोग इन संसाधनों से वंचित रह जाते है जो समानता के अधिकार से उचित नहीं है।
04 शिक्षकों को प्रशिक्षण का आभाव
शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने से योग्य एवं अनुभवी शिक्षकों से अधिक लाभ ऑनलाइन शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। तकनीक में हमारे युवा शिक्षक कुछ हद तक ओनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। किन्तु वरिष्ठ अनुभवी शिक्षकों को प्रशिक्षण न मिलने से उनका लाभ विद्यार्थियों को नहीं हो पा रहा है |
05. आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण न होना
स्कूल में विद्यार्थियों को किताबों के साथ साथ अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों के माध्यम से आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण किया जाता है | जिससे विद्यार्थी अपनी पढाई के साथ अन्य कलाओं में भी निपुण बनता है | किन्तु ऑनलाइन शिक्षा में इन सब का अभाव रहता है |जिससे विद्यार्थी शेक्षणिक रूप से तो अव्वल हो सकता है परन्तु वह आदर्श व्यक्तित्व नहीं बना पाता|
“शैक्षिक तकनीक “ शिक्षा जगत में विशेषकर भारत में नवाचार समय समय पर होते रहे है |अपनी अनेक उपयोगिता के फलस्वरूप शिक्षा जगत के प्रत्येक आयाम पर तकनीक का प्रभाव पड़ रहा है | कक्षा में अध्यन के दोरान विद्यार्थियों को द्रश्य श्रव्य उपकरण कोतुहल का विषय रहे है | विज्ञान की उन्नतीके कारन ये द्रश्य श्रव्य उपकरण आकार में छोटे और प्रभाव में बहुत बड़े काम के साधन बनते जा आहे है | विषय वास्तु को अधिक रुचिकर बनाने के लिए इन नवाचारी शिक्षकों ने कोई कोर कसार नहीं छोड़ी है | नित नए नए प्रयोगों एवं उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग से ज्ञान तथ्यों को तर्कों के दुआर सरल और सभी के सुलभ बनाने का प्रयाश किया है | चाहे वो रेडिओ पर मीना की दुनिया की कहानी हो ! चाहे भूगोल की घटनाओं की ध्वनि हो! प्रोजेक्टर के प्रयोग से भी पीपीटी, स्लाइड और लघु फिल्में सदेव शिक्षा के मंदिरों में उपयोग में लती जाती रही है | कितु एक्बदा प्रश्न यही है की जव सब कुछ संशाधन सुलभ होते हुए ही वर्तमान समाज का कौशल स्तर या कहूँ विध्यार्थियू का ज्ञान का स्तर इतनाकम क्यों है | सरकारी स्कूल में बच्चों के उपस्तिथि न के बराबर है | प्रश्न का जबाब सरल और स्पस्ट है किन्तु कडवा है की हमारे शिक्षकों को नित नए नवाचारों से अपने आप को जोड़ने में भय लगता है | इसके अनेकों कारन है जिन पर पहले भी अनुसधान किये जाते रहे है और आगे भी होंगे | कितु मूल कारण जो मुझे समझ आता है वो है व्यक्ति का अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण का आभाव !
वर्तमान बढती जनसख्या और बढती चुनोतियों के बीच तकनीक उज्जल भविष्य देने में सक्षम साधन बन कर उभर रहे है| अब चाहे इंसानी शिक्षक अपनी कुर्सी से उठे या नहीं तकनीक के दरवाजे सदैव सभी के लिए समान रूप से बिना भेदभाव के खुले रहते है | आज तकनीक सिमट कर हाथों से समां गई है | विद्यार्थी जब चाहे अपनी समस्या का समाधान इंटरनेट के माध्यम से खोज ही लेता है | किन्तु इन सब के बीच बाधाएं भी बहुत है | सभी तक तकनीकी साधन अभी पहुच नहीं पाए | अधिकांश जनसँख्या गरीबी के भवर से बहार निकले तो कुछ जुगाड़ भी करे | आधुनिकता ने अपनी जड़ें इतनी गहरी जमा ली है की आवस्यकता से अधिक खर्चे दूसरों को दिखाने में हो जाता है | आदमी कमाए भी तो कहाँ से रोजगार के अबसर न के बराबर है | ग्राम के प्रधान के पास भी मिटटी खोदने के आलावा कोई काम नहीं और न अधिक मजदूरी| तो फिर इन होनहार विद्यार्थियों को महंगे मोबाइल कहाँ से दिला दूँ और कह दूँ की बेटा अगर पढना है तो ऑनलाइन क्लास के लिए पिताजी से महंगा मोबाइल मंगवा लो | एक सच्ची घटना जो मेरे साथ बीती आज यहाँ बता देना मुझे उचित लग रहा है | हुआ यूँ की दसवी की परीक्षा में 97 प्रतिशत अंक लाने वाला मेरा छात्र जब ग्यारहवी में आया और आते ही वर्तमान महामारी के चलते शिक्षा के दरवाजे बंद करने पड़े | वो एक दिन बोला “गुरूजी ! में अब क्या करूं और अब मेरा क्या होगा? अभी तक तो सब कुछ आप सब के सानिध्य में अच्छे में सीखा है”| इनता कहते ही उसके शब्द लड़खड़ाने लगे | मेने जब कहा की “चिंता क्यों करते हो आज कल में और अन्य शिक्षक ऑनलाइन क्लास ले रहें है तुम भी जुड़ जाया करो|” इतना सुनते ही बेचारे! के नयनो से अश्रु धारा निकल पड़ी ! यह कहानी एक बच्चे की नहीं अपितु मेरे टॉप-10 विद्यार्थियों की यही समस्या थी | लाखों होनहार युवाओं की भी यही कहानी है की बिना हथियारों के युद्ध कैसे जीता जाए |
महामारी का संकट अने से पहले हम सभी बहुत बड़े स्वघोषित योद्धा थे | संकट के आने पर अपने विषय में स्वंय को अशहय पाने के आलावा कुछ न कर पाए | जब ईमानदारी से प्रयास करने का बिचार किया जाए तो ईस्वर रस्ता अवस्य दिखा देते है |एक रास्ता हमें भी मिला हमने कुछ नोट्स प्रिंट करवाए और कुछ बड़े बच्चों के नोट्स एकत्रित कर फोटो कॉपी सेट बना कर सभी तक पहुचाये . अभी हमारे इस छोटे से प्रयोग से हमारे विद्यार्थी एक बार फिर से मुस्कुरा उठे |
ऐसा नहीं की शासन ने कुछ नहीं किया | बहुत कुछ किया किन्तु बिना जमीन देखे किया ! नीतियों को बनाने बाले कभी अपने अनुकूलित कमरों से बाहर ही नहीं निकल पाए | और जो बाहर जमीन को छाने बैठे थे उनसे पूछना तो दूर किसी ने ये तक नहीं बताया की अब पाठ्यक्रम बदल दिया गया है और किताबें अभी छप रही है | एक शिक्षक जो अपने आप को हर परिस्थिति में एडजस्ट कर ही लेता है इस बदलाव को भी कर गया |
विचार करने योग्य है कि जब हमारी शासकीय शालाओं के अधिकतर बच्चे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हो जिनका पुख्ता प्रमाण शासकीय कार्यालयों में प्रत्येक माह जमा होता रहा है | फिर किस लिए अरबों रुपयों के बजट को चाय नसते और बैठकों में बेफजूल लुटा दिया | Digi-lep एक ऐसा ही कार्यक्रम म.प्र. शासन ने बनाया और इसपर जितना पैसा लुटाया इतना पैसा यदि धरातल पर खर्च किया जाता तो प्रतेक मोहल्ले में समार्ट क्लास का निर्माण हम कर लेते | अपने गाँव , मोहल्ले को स्मार्ट बनाने का एक प्रस्ताव मेरे पास है जिसे जमीन से जुड़े रहने के कारन बना पाया| आपको इसे अगले अध्याय में विस्तार से बताऊंगा |
समाज तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मार्ग सुलभ हो ये शिक्षक एवं शासन दोनों की विशेष जिम्मेदारी है | साथ ही शिक्षक को अपने कर्तव्य को समझना होगा , नवाचारों हेतु स्वंय पहल करनी चाहिए | एवं संस्था प्रधान या शासन को ऐसे होनहार और बिरले अति विशिस्ट शिक्षकों को पुरुस्कृत करना चाहिए जिससे अन्य शिक्षक भी प्रेरित हों| जब परिवर्तन हेतु हमारा सम्पूर्ण शिक्षक समाज नित नए नवाचारों हेतु सज्ज रहेगा तो इस निजीकरण की अंधी से अपने रोजगार के साधनों को बचाए रखेगा | ऑनलाइन शिक्षा समय परिस्थिति अनुसार कारगर उपाए तो है किन्तु सच्चाई इसी में है के विचारों की खेती दूर रखे दीपक की रौशनी में सम्भव नहीं | इसके लिए हमारे लिए स्वंय अपनी मशालें जलानी चाहिए जिससे हमारा समाज और युवा पीढ़ी सच्चे अर्थों में शिक्षा के रहस्यों को सीख कर अपने जीवन मार्ग को व्यवस्थित और सुरक्षित बना सके| इसी में हमारी और हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा बरना निजीकरण न जाने कितने विभाग और उनके कर्मचारियों के सपनों को बंजर बना चूका है |
07. ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने हेतु प्रभावी कार्ययोजना हेतु सुझाव।
ऑनलाइन शिक्षा सभी को सुलभ होना चाहिए उस तक पहुचने के मार्ग सुगम होने चाहिए| किंतु इन स्कूलों को राइज कर गरीब की पहुँच से दूर किया जा रहा है | समय बदलता है सत्ताधारी भी बदलेंगे | किन्तु बदलना तो हमारी नीतियों को चाहिए | नीतियां ही समाज के लिए मार्ग दिखाती है | मार्ग हाई-वे हो या आई- वे सभी के लिए एक समान लाभ पहुचाये|
बजट का दूसरा जिम्मेदार व्यक्ति है विधायक महोदय! इन्हें भी लोगों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करना चाहिए | यह सर्वसिद्ध सत्य है की जब तक समाज को अपने स्वास्थ्य और शिक्षा की गारंटी नहीं मिल जाती | वो शांति से नहीं रह सकता | गारंटी को वर्तमान शिक्षा और स्वास्थ्य की गारंटी की तरह नहीं होना चाहिए | गारंटी तो शिक्षा की भी संबिधान देता है किन्तु इस गारंटी के कारण हमारी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था की गुर्गति हुए है ये आप सभी से छुपी नहीं है | मेरी ‘गारंटी’ की तुलना तो हमारे देश की राजधानी की व्यवस्था से है | हमें ऐसी व्यबस्थाओं से सीख लेनी चाहिए की यदि करने की जिद और जुनून हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं होता |
अतः ऑनलाइन शिक्षा सभी तक समान रूप से पहुँच सके इस हेतु अपना एक सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ | हमारे इस प्रयास को सफल बनाने हेतु सर्वप्रथम हमें ‘स्मार्ट मोहल्ला क्लास रूम’ की स्थापना करनी होगी | इसकी रूपरेखा इस प्रकार होगी –
(नोट : 01. बाजार अनुसार मूल्य में लागत में उतार चड़ाव सम्भव है
02.सामग्री पर व्यय ग्राम पंचायत स्थानीय निधि एवं विधानसभा जन प्रतिनिधि के द्वारा संयुक्त रूप से 50-50% किया जाना प्रस्तावित है| )
· स्थानीय रूप से उपलब्ध शासकीय भवन या निजी भवन का उपयोग किया जा सकता है|
· इसके रखरखाव एवं देखरेख हेतु स्थानीय स्वयंसेवक या शासकीय कर्मचारी(शिक्षक /आंगनवाड़ी कार्यकर्ता)की मदद ले सकते है |
· विद्युत की व्यवस्था स्थानीय ग्राम पंचायत से ली जाए |
· इन्टरनेट कनेक्शन wi-fi या स्मार्ट फ़ोन के माध्यम से नियुक्त कर्मचारी/स्वयंसेवक द्वारा उपलब्ध कराया जाए | इसका चार्ज पंचायत दे |
· अथवा शैक्षिक सामग्री पेन-ड्राइव में रिकॉर्ड कर प्रदर्शित की जा सकती है |
· प्रत्येक ग्राम में औसतन तीन ‘स्मार्ट मोहल्ला क्लास रूम’ की आवश्यकता हो सकती है | अतः लगभग 1 लाख रुपये से कम राशि में हम अपने ग्राम या वार्ड के गरीब बच्चों के लिए ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर सकते है |
· विधायक महोदय एवं ग्राम प्रधान हेतु इस बजट की व्यवस्था करना बहुत आसान काम है |
अतः इस प्रकार हम अपने ग्राम या वार्ड में गरीब होनहार बच्चों हेतु ‘स्मार्ट मोहल्ला क्लास रूम’ तैयार कर सकते है | स्मार्ट क्लास रूम को अच्छे व प्रभावी रूप से संचालित करने हेतु मेरे पास AI (कृत्रिम बुद्धि) प्रोजेक्ट भी है जिसकी संछिप्त रूपरेखा इस प्रकार होगी –
· AI (कृतिम वुद्धि) एक सोफ्ट्वेयर से नियंत्रित प्रोग्राम होगा |
· इस प्रोग्राम में 15 GB डाटा को स्टोर और प्ले करने की क्षमता(कृतिम वुद्धि) होगी |
· इसमें साप्ताहिक विषय सामग्री कक्षा अनुसार गूगल ड्राइव, youtube एवं स्थानीय स्तर से रिकॉर्ड सामग्री को सुरक्षित किया जायेगा |
· प्रोग्राम स्मार्ट कैमरा से जुड़ा रहेगा |(स्मार्ट कैमरा से आशय गूगल लेंस,गूगल असिस्टेंस,वाई-फाई एवं गूगल ड्राइव अदि आधुनिक तकनीक वाला कैमरा |)
· AI प्रोग्राम में विषय,कक्षा,पाठ्यक्रम एवं कालखंड अनुसार पहले से निर्धारित किया जा सकेगा की बच्चों को क्या पढाया जाना है |
· स्मार्ट कैमरा इस बात का पूरा रिकॉर्ड रखेगा की ऑनलाइन पढ़ाई करते दौरान बच्चे कहीं नीरस या बोर तो नहीं हो रहे | AI प्रोग्राम इस दशा में पाठ्यक्रम के मनोरंजन वाले भाग को स्वतः प्ले कर देगा|
· स्मार्ट कैमरा प्रोग्राम को सन्देश देगा की जो विषय सामग्री बच्चों को पढाई जा रही है, बच्चे उसे समझ नहीं पा रहे है अतः AI प्रोग्राम विषय वस्तु से जुड़े अन्य जानकारियां दे कर बच्चों के लिए विषय वस्तु को रुचिकर बनाकर इसे समझने हेतु मदद करेगा |
· यह कैमरा इस बात का भी ख्याल रखेगा की एक निश्चित अंतराल पर बच्चों को आराम करने का मौका मिलता रहे |
· बच्चे यदि ऑनलाइन कक्षा के दौरान प्रश्न करते है तो गूगल असिस्टेंट से इसका उचित जवाब भी दिया जा सकेगा |
· निश्चित समय अवधि उपरांत इसमें सुरक्षित डाटा को गूगल ड्राइव से अपडेट भी किया जा सकेगा |
· समार्ट कैमरा समय समय पर पाठ्यक्रम को दोहराता भी रहेगा एवं बच्चों से इससे जुड़े प्रश्न भी करेगा जिससे बच्चे ध्यानपूर्वक अध्ययन करें |
· इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा की ऑनलाइन पाठ्य सामग्री स्थानीय शिक्षक द्वारा सरल भाषा में रिकॉर्ड किया जाए|
· आवश्यकतानुसार समय समय पर लिखित सहायक सामग्री/प्रश्न-पत्र/नोट्स/चित्र व अन्य पत्र प्रिंटर के माध्यम से छापी जा सकती है |
· AI प्रोग्राम का निरीक्षण एवं फीडबैक लिया जाएगा और आवश्यकता अनुसार इसमें सुधार किया जा सकेगा|
· इस AI तकनीक से नामांकित छात्रों का समस्त रिकॉर्ड संधारित भी किया जाएगा जिसमें विशेषतः छात्र की उपस्थिति, मूल्यांकन आधारित शैक्षणिक विकास, स्वास्थ्य व अन्य |
फ्री DTH सेटअप बॉक्स के द्वारा विभिन्न चैनलों से प्रसारित ज्ञानवर्धक कार्यक्रम भी बचे हुए समय में बच्चों को दिखाए जा सकते है|
08. सारांश
जिस प्रकार शरीर की वृद्धि हेतु अन्य ग्रहण करना आवश्यक है| ठीक उसी प्रकार मन-मस्तिस्क के विकास (ज्ञान) हेतु शिक्षा परम आवश्यक है | इन दोनों में अंतर केवल इतना है की अन्य की आवश्यकता जीवनपर्यन्त रहती है और शिक्षा की आवस्यकता एक निश्चित समय काल तक | एक बार जब मनुष्य अपनी शिक्षा पूरी कर लेता है (व्यक्ति अपने अनुभवों और परिस्थिति से जीवन भर शिक्षा लेता रहता है )| एक निश्चित समय उपरांत उसे वाहरी शिक्षा प्रणाली पर निर्भर नहीं रहना पड़ता | अतः प्राचीन समय से राजा –महाराजा इसे अपनी प्राथमिक कार्य योजनायें मानते थे | उनका मत था की ‘सठ संगत न देय विधाता ‘ अर्थात हजार पढे लिखे दुश्मन एक अनपढ़ दोस्त से कही अधिक अच्छे है | समाज को शिक्षा का मूल्य न चुकाना पढ़े यदि इसका मूल्य चुकाना पड़ा तो समाज का अधिकांस वर्ग इससे बंचित रह सकता है | अतः इसे प्राचीन काल से ही निःशुल्क और अनिवार्य किया जाता रहा है |
स्थानीय निकायों व ग्राम पंचायत की योजना हो की चाहे नदी-नालों पर डैम बन पाए न बन पाए , गली में दुबारा कंक्रीट सड़क बने या न बने पर किसी गरीब का होनहार बच्चा पैसों की कमी के कारण उचित शिक्षा के अवसरों से वंचित न रहे| ग्राम प्रधान को चाहिए की जो बजट उसे मिलता है उसका एक हिश्सा ऐसे होनहार बालकों की छात्रवृति हेतु संचय करे जिससे उसके ग्राम /वार्ड की प्रतिभाएं मुरझा न पायें |
एक सभ्य समाज की नींव सदैव नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य और स्वस्थ मस्तिष्क पर टिकी होती है | किसी देश या राज्य के नागरिक स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर निश्चिन्त होते है तो देश के प्रति उनका पूर्ण समर्पण भाव रहता है | ऐसी दशा में नागरिक अपने भविष्य हेतु अधिक धन संचय नहीं करते जो देश की आर्थिक सेहत के लिए उत्तम उपाय भी हो सकता है| कार्यपालिका को चाहिए कि वह अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करे एवं समय से उचित सुधार भी करे , जिससे शिक्षा की दुर्दशा होने से रोका जा सके |
अतः सरकार को अपनी योजनाओं में इन मुद्दों पर विशेष ध्यान देना चाहिए की समाज का कोई भी वर्ग शिक्षा से वंचित न रहे | समाज शिक्षित और संस्कारवान लोगों के कारण अधिक सुरक्षित रहता है | दिशा हीन, संस्कारहीन युवा, संक्रमण फैला रहे वायरस से कहीं अधिक हानिकारक हो सकता है |
साथ ही जैसा संवैधानिक व्यवस्था में लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना का संकल्प लिया गया है | ठीक उसी प्रकार सरकार को ऑनलाइन शिक्षा को भी लोगो के कल्याण हेतु उपलब्ध करनी चाहिए | आज एक दशक से जिस प्रकार ऑनलाइन शिक्षा दे रहे संस्थानों ने अपने प्रभाव से लोगों को आकर्षित किया है | शासकीय व निजी शिक्षक जो वर्षों से इस व्यवसाय में अपना खून पसीना बहा कर देश के नोजवानों को तराश रहे है | इस कार्य के बदले थोड़े से मानदेय से संतुष्ट वे अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे है | कहीं ऐसा ना हो की ऑनलाइन शिक्षा आ जाने से इन सब के रोजगार छीन कर उन्हें सड़क पर ला खड़ा कर दिया जाए |
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बहुत सुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद आपका आशीर्वाद सदैव बना रहे
DeleteVery good rai sab
ReplyDeleteVery good rai sab
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