Friday, 30 April 2021

चल भाई ! मास्क लगा और काम पर चल

 

          


 (कोरोना काल में अपनी सेवाएं दे रहे सभी कर्मचारी भाइयों को समर्पित मेरी श्रद्धा काव्यांजलि) 

 चल भाई ! मास्क लगा और काम पर चल

 नित नये फ़रमान आ रहे, तू अपनी तैयारी रख |

सब पीछे-पीछे आ रहे , तू खुद की ख़ुद्दारी रख ||

चल में भी चल रहा हूँ , तू भी अपने कर्तव्य पर चल |

चल भाई!  मास्क लगा और अपने काम पर चल ||

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कोई नहीं तेरा इस मतलव के जमघट में |

थोडा रुक, देख ढेर लगा है  मरघट में ||

क्यों रोता फिर रहा जन-जन के आगे |

कोई मूल्य नहीं है, धन-बल के आगे ||

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प्रलय तक खुले रखने है बैंक, ‘परम-राज’ कर प्रबंधन खातों का ||

तेरे कोशल को मिलने है थेंक, ध्यान धरेगी धरणी तेरे अपनों का ||

हे! बाल सखा अपना ख्याल रखना, नियमित मास्क लगाना गलेवान पर   |

बहुत सताती यादें बचपन की, बचे रहे तो मिलना होगा होली और रमजान पर ||

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नेता तो बातों के है, उनकी चिकनी वातों का क्या |

वोटों की वेला टल जाये,इनके मोहनी वादों का क्या ||

लाशों का अम्वार ना दिखता, इनको तेरे छोरों से क्या |

ममता का बंगाल न छोड़ें, इनको तेरे छालों से क्या ||

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कट जायेगा जीवन, अपने सपनों की चिता जला |

चल शीतल-ध्यान लगा, अपने पंखों की गति बढ़ा ||

थोडा सुस्ता लो वीर, आराम छोड़ अपनी फ़िकर न कर |

लाखों को बंधी है तुमसे आस, प्राण-वायु को देर न कर ||

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सिनेमा ने समाधी ले ली, पढ़े लिखे समझे इसको व्याधि |

तू टिका रहना योद्धा, बरना दुनियाँ समझे तुमको अपराधी ||

मेरे अपने विकसित  देश की यही महान गाथा है |

पुलिस को देते है डंडा, अकेला मास्क तुम्ही पर भाता है ||

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सत्ता सुख भोग रहे सब नेता, अपना भीष्म भी गैर-जिम्मेदार है |

सेवक ने बहुत कुछ बेचा, लूटने में हकीम भी हिस्सेदार है ||

 अब छोड़ दे इन बातों को, टिफिन उठा और खाने चल  

चल भाई!  मास्क लगा और अपने काम पर चल ||

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दिनांक:- शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021              रचना:- मुरारी लाल राय `गप्पी`

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