सब
पीछे-पीछे आ रहे , तू खुद की ख़ुद्दारी रख ||
चल में भी
चल रहा हूँ , तू भी अपने कर्तव्य पर चल |
चल भाई! मास्क लगा और अपने काम पर चल ||
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कोई नहीं
तेरा इस मतलव के जमघट में |
थोडा रुक,
देख ढेर लगा है मरघट में ||
क्यों रोता
फिर रहा जन-जन के आगे |
कोई मूल्य
नहीं है, धन-बल के आगे ||
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प्रलय तक
खुले रखने है बैंक, ‘परम-राज’ कर प्रबंधन खातों का ||
तेरे कोशल
को मिलने है थेंक, ध्यान धरेगी धरणी तेरे अपनों का ||
हे! बाल सखा
अपना ख्याल रखना, नियमित मास्क लगाना गलेवान पर |
बहुत सताती यादें
बचपन की, बचे रहे तो मिलना होगा होली और रमजान पर ||
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नेता तो
बातों के है, उनकी चिकनी वातों का क्या |
वोटों की
वेला टल जाये,इनके मोहनी वादों का क्या ||
लाशों का
अम्वार ना दिखता, इनको तेरे छोरों से क्या |
ममता का
बंगाल न छोड़ें, इनको तेरे छालों से क्या ||
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कट जायेगा
जीवन, अपने सपनों की चिता जला |
चल शीतल-ध्यान
लगा, अपने पंखों की गति बढ़ा ||
थोडा सुस्ता
लो वीर, आराम छोड़ अपनी फ़िकर न कर |
लाखों को
बंधी है तुमसे आस, प्राण-वायु को देर न कर ||
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सिनेमा ने
समाधी ले ली, पढ़े लिखे समझे इसको व्याधि |
तू टिका
रहना योद्धा, बरना दुनियाँ समझे तुमको अपराधी ||
मेरे अपने
विकसित देश की यही महान गाथा है |
पुलिस को देते
है डंडा, अकेला मास्क तुम्ही पर भाता है ||
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सत्ता सुख
भोग रहे सब नेता, अपना भीष्म भी गैर-जिम्मेदार है |
सेवक ने बहुत
कुछ बेचा, लूटने में हकीम भी हिस्सेदार है ||
अब छोड़ दे इन बातों को, टिफिन उठा और खाने चल
चल
भाई! मास्क लगा और अपने काम पर चल ||
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दिनांक:- शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021 रचना:- मुरारी लाल
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