हर दर्द की दवा धारा 370 ।
किसान को कर्ज से मुक्ति को तरशाती है धारा
गरीब के फटे आशियाने में जल टपकाती है धारा।
अच्छे अच्छे कल कारखाने कबाड़ में बिचवा दे धारा
हर नाकामी छिपा, जनता का मुंह बंद कर देती धारा।
असली मुद्दों को छिपा झूठे ठोंग रचा लेती धारा।
खुद से कुछ होता नहीं, दूसरों का राग अलाप्ती धारा
काम की बात भूल मन की बात सुनाती धारा
राजनीति को कलंकित करती फिरती धारा
काले कुकर्मों को चादर में लपेट लेती धारा
पुरखों की जायदाद गिरवी रख देती धारा ।
युवाओं को पकोड़े तलने को कहती धारा
घोषणाओं का झुनझुना हमें पकड़ाती धारा ।
फ़ैशन शो में नित नए परिधान पहनलेती धारा
मंहगाई से मुंह छिपाती फिरती बड़बोली धारा
शिक्षा की नई दुकानें चलवाती धारा।
अंधे समर्थको को खूब नचवाती धारा।।
झूंठ फरेव की पराकाष्ठा दिखाती धारा
आशाओं को धूल बटोरना सिखाती धारा ।।
अब धारा ही मुद्दा है,धारा से ही खाली पेट भरना है।
तुम्हारा कोई सागिर्ड नहीं, खुद का खुद को करना है ।।
कोई पूछने वाला नहीं, आत्म निर्भर बनना फ़साना है।
ग़म पी रहा है गप्पी, अंधा मूकदर्शक बना ज़माना है।।
@गप्पी

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